विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली ने क्यों बढ़ाई बाजार की चिंता
भारतीय शेयर बाजार इन दिनों एक अहम बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हाल ही में Foreign Portfolio Investors (FPI) ने करीब ₹36,000 करोड़ की भारी बिकवाली की है, जिससे Sensex और Nifty दोनों पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। यह बिकवाली सिर्फ एक हफ्ते या महीने की नहीं, बल्कि 2025 में अब तक के सबसे बड़े विदेशी आउटफ्लो में से एक मानी जा रही है।
आखिर विदेशी निवेशक भारतीय शेयर क्यों बेच रहे हैं?
इस अचानक हुए एग्जिट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण छिपे हैं।
सबसे बड़ा कारण है अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें। US Bonds और Dollar Assets फिलहाल बेहतर और सुरक्षित रिटर्न दे रहे हैं, जिससे विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।
दूसरा अहम कारण है भारतीय शेयर बाजार का ऊंचा वैल्यूएशन। पिछले कुछ वर्षों में Indian equities ने शानदार रिटर्न दिए हैं, ऐसे में कई ग्लोबल फंड्स ने मुनाफा वसूलना बेहतर समझा।
इसके अलावा, रुपये में कमजोरी, ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव और कुछ सेक्टर्स में कमजोर तिमाही नतीजों ने भी विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।इस बिकवाली का बाजार पर क्या असर पड़ा?
Foreign selling का असर खासतौर पर Banking, IT और Financial stocks में देखा गया। कई बड़े शेयरों में गिरावट आई और बाजार में volatility बढ़ी।
हालांकि राहत की बात यह रही कि Domestic Institutional Investors (DII) और retail निवेशकों ने बाजार में मजबूत खरीदारी जारी रखी। Mutual Fund SIPs और घरेलू निवेश ने बाजार को बड़े गिरावट से बचाया।
क्या यह भारतीय बाजार के लिए खतरे की घंटी है?
Market experts मानते हैं कि यह पूरी तरह नकारात्मक संकेत नहीं है। भारत की economic growth story, मजबूत घरेलू मांग और बढ़ती retail participation अब भी बाजार को सपोर्ट कर रही है।
Foreign investors का आना-जाना global cycles का हिस्सा है। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह दौर panic का नहीं, बल्कि समझदारी से निवेश करने का है।
निवेशकों के लिए क्या सीख?
विदेशी बिकवाली headlines जरूर बनाती है, लेकिन बाजार की असली ताकत fundamentals में होती है। जिन निवेशकों का नजरिया long-term है, उनके लिए ऐसे corrections भविष्य के अवसर भी बन सकते हैं।
निष्कर्ष:
₹36,000 करोड़ का विदेशी एग्जिट बाजार में हलचल जरूर पैदा करता है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार की मजबूती अभी भी कायम है। आने वाले समय में global संकेतों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों की भूमिका बाजार की दिशा तय करेगी।